Wednesday, 15 February 2017

मै मानव प्रजाति का प्राणी, मेरी हालत आज उस मकड़ी की तरह है जो खुद के बनाए जाल मे फंसी हुई है।  मेरी खुद की वर्तमान हालत के लिए मै मानव खुद जिम्मेदार हू। चाहे मै किसी भी चीज के लिए परेसान हू जैसे जाति- धर्म -नौकरी -चाकरी- शादी- विवाह- संतान -पैसा -धन -सोना -चांदी -हीरे -घर -मकान- या मेरी खुद की सामाजिक इज्ज़त सभी मेरे द्वारा ही बनाए गए थे और आज मै खुद उसी मे उलझा हुआ हू।

मेरा ये ब्लॉग किसी और को ले जाए चाहे ना ले जाए पर मुझे जरूर मेरे द्वारा स्रजित सभी चीजों से ऊपर उठ के सोचने के लिए मजबूर करेगा ॥

इसी आशा के साथ

आपका   साथी
मानव

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